Page 74 - E-Magazine - ISS 2025
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सोशल मीिडया क बरी आदत
सोशल मीिडया क िनया, रग- बरगी छाया,
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हर पल इसम खोया रह, जीवन हो रहा पराया |
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फसबक, इ टा ाम और हा एप का खल,
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हम सब इसम खो गए, भल गए अपना मल |
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िदन-रात फोन म झाकत, अपन स हम र भागत |
दो त क जगह फॉलोअस क गनती,
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लाइ स और कम म, शय को बनती |
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मा-बाप का यार छट, दो त स भी हम ठ |
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बाहर खलना भल हम, फोन म लग रहत हरदम |
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चलो, मलकर समझ हम जीवन को न बबाद कर हम |
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स ी खशी पाए हम,
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सोशल मीिडया स कम, अपन स यादा मल हम |
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लीशा सुबुधी
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