Page 72 - E-Magazine - ISS 2025
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बचपन
चाँद है एक हाथ म जे म क ु छ तारे पड़े,
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फ ू ल कदम क तले थे और हम औचक खड़े।
दख रही है उ क सीमा क जसक पार हम,
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बालपन को छोड़ अब उस पार हम कसे बढ़ !
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उस पार क संघष से अ र सहमता है दय,
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बचपन क सभी मरी चका म ह गड़े।
कससे कह क भोर क तारे हम भाने लगे,
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व ठहरा नह तो साथ हम भी चल पड़े |
आ ा रावत
XI B
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